उत्तराखंड में यहाँ रेरा ने दिखाई सख्ती: आदेशों की अवहेलना पर सामिया इंटरनेशनल बिल्डर्स पर भारी जुर्माना……..
हल्द्वानी: उत्तराखंड में रेरा ने बिल्डरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा), उत्तराखंड ने रुद्रपुर की ‘एनआरआई लेक सिटी’ परियोजना के प्रमोटर सामिया इंटरनेशनल बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड पर महत्वपूर्ण जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई कंपनी द्वारा जारी आदेशों की लगातार अवहेलना और होमबायर्स के अधिकारों के उल्लंघन के कारण की गई है।
रेरा के सदस्य नरेश सी. मठपाल द्वारा पारित आदेश में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 63 के प्रावधानों के तहत प्रतिदिन 25,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है। यदि बिल्डर 30 दिनों के अंदर यह राशि जमा नहीं करता या प्रभावित खरीदार को फ्लैट का कब्जा नहीं सौंपता, तो कुल दंड राशि बढ़कर 50 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी। इस राशि को 45 दिनों के भीतर रेरा के खाते में जमा करना अनिवार्य होगा।
आदेश में रेरा ने ऊधम सिंह नगर जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस की मदद से शिकायतकर्ता को फ्लैट का कब्जा दिलाया जाए। साथ ही, बिल्डर से वसूली गई रकम सीधे पीड़ित खरीदार को हस्तांतरित की जाए। बिल्डर को फ्लैट की मूल राशि पर ब्याज सहित कुल 9.70 लाख रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
मामले की जांच में सामने आया कि रुद्रपुर की इस परियोजना में फ्लैट नंबर 114 के मालिक शब्बीर अहमद को लंबे समय से कब्जा देने से रोका जा रहा था। रेरा द्वारा 11 सितंबर 2023 को दिए गए आदेश के बावजूद न तो फ्लैट सौंपा गया और न ही ब्याज सहित राशि लौटाई गई। इसके अलावा, विवादित फ्लैट को तीसरे पक्ष को बेच दिया गया, जिसे रेरा ने गंभीर उल्लंघन और आपराधिक प्रकृति का कृत्य माना है।
रेरा ने न केवल बिल्डर को निशाने पर लिया, बल्कि ऊधम सिंह नगर जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर भी नाराजगी जताई। 25 नवंबर 2024 को कब्जा दिलाने के लिए भेजे गए पत्र पर कोई कार्रवाई न होने के कारण उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। दोषी अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी जाएगी।
इस फैसले से उत्तराखंड के रियल एस्टेट सेक्टर में सनसनी फैल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन प्रमोटरों के लिए चेतावनी है जो लंबे समय से होमबायर्स की जमा पूंजी फंसाकर कानूनी प्रक्रियाओं से बचते रहे हैं। रेरा की यह सख्ती प्रदेश में खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

