उत्तराखंड के तांकुल जलविद्युत परियोजना से धारचूला क्षेत्र को मिलेगी नई ऊर्जा की रोशनी…….

पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती इलाके धारचूला में जल्द ही 12 मेगावाट क्षमता वाली तांकुल लघु जलविद्युत परियोजना का निर्माण शुरू होने वाला है। केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए आवश्यक भूमि हस्तांतरण की मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे स्थानीय क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल को भी विद्युत आपूर्ति में लाभ पहुंचेगा।

यह परियोजना रन-ऑफ-द-रिवर तकनीक पर आधारित है, जिसमें किसी बड़े बांध की आवश्यकता नहीं पड़ती। बिजली उत्पादन के लिए नदी के प्राकृतिक प्रवाह और गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस डिजाइन के कारण पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और क्षेत्र की भौगोलिक संरचना भी सुरक्षित रहेगी।

केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएन) के बोर्ड ने परियोजना के डिजाइन, ड्राइंग और संबंधित कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया हेतु वित्तीय मंजूरी दे दी है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:-
पावर हाउस मांगती गांव में स्थापित किया जाएगा।
बंगबंग स्थान पर वेयर (Weir) का निर्माण होगा, जहां से पानी को नियंत्रित कर पाइपलाइन के माध्यम से पावर हाउस तक पहुंचाया जाएगा।

चार यूनिटों वाली डबल जेट पेल्टन टरबाइन लगाई जाएंगी, प्रत्येक यूनिट 3 मेगावाट की।

कुल क्षमता 12 मेगावाट रहेगी, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 69.66 मिलियन यूनिट (kWh) बिजली उत्पादित होगी।

परियोजना की अनुमानित लागत 146.3291 करोड़ रुपये है।

उत्तराखंड में रन-ऑफ-द-रिवर आधारित कई अन्य परियोजनाएं पहले से संचालित या प्रस्तावित हैं, जैसे दुनाव (पौड़ी), पिलानगाड़ (उत्तरकाशी), उरगम (चमोली), गैलोगी (मसूरी, देहरादून), कालीगंगा प्रथम एवं द्वितीय (रुद्रप्रयाग), मदमहेश्वर (रुद्रप्रयाग) तथा सुरिंगगाड़ (मुनस्यारी, पिथौरागढ़)।

पिथौरागढ़ जिले में वर्तमान में सबसे बड़ी परियोजना धौलीगंगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है, जो 280 मेगावाट क्षमता की है। यह NHPC द्वारा संचालित है और वर्ष 2005 से चालू है। इसके अलावा सुरिंगगाड़-II (लगभग 5 MW) जैसी छोटी परियोजनाएं भी यूजेवीएन द्वारा चलाई जा रही हैं।

प्रस्तावित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गोरीगंगा नदी पर सिरकारी भ्योल रूपसियाबगड़ (120 MW) और धौलीगंगा पर सेला-अर्थिंग (114 MW) शामिल हैं, जिनकी मंजूरी एवं तैयारी प्रक्रिया जारी है।

तांकुल परियोजना सीमांत क्षेत्रों में ऊर्जा उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय विकास को नई गति प्रदान करेगी, बिना पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़े।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *