उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में बिछी है बर्फ की 8 फीट मोटी चादर, 23 मई को कपाट खुलने से पहले चुनौतियां…….

चमोली: हेमकुंड साहिब में अभी भी आठ फीट से अधिक बर्फ जमी है, जिससे 23 मई को कपाट खुलने से पहले चुनौतियां बढ़ गई हैं। सेना के दल को बर्फ के बीच छह किमी का सफर।

हेमकुंड साहिब बर्फ की स्थिति का अवलोकन करने गए सेना के दल को बर्फ के बीच छह किमी का सफर तय करना पड़ा। धाम में अभी आठ फीट से अधिक बर्फ मौजूद है।

साथ ही अटलाकोटी व छोटी अटलाकोटी में हिमखंड पसरे हुए हैं, जो यात्रा के दौरान चुनौती बनेंगे। हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 23 मई को खोले जाने हैं।

गुरुद्वारे के चार सेवादारों के साथ सेना का तीन सदस्यीय दल शुक्रवार को गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुआ था, लेकिन बर्फबारी के चलते शनिवार को अटलाकोटी से वापस घांघरिया लौटा आया।

रविवार सुबह मौसम साफ होने पर दल बर्फ पर चलकर छोटी अटलाकोटी से हेमकुंड साहिब पहुंचा। शाम को घांघरिया लौटने पर दल ने बताया कि इसी दौरान धाम में फिर बर्फबारी शुरू हो गई। गुरुद्वारा

श्री हेमकुंड साहिब मैनजमेंट ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड में अभी आठ फीट से अधिक बर्फ है।

सरोवर के अलावा गुरुद्वारा साहिब का लंगर हाल व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर बर्फ से ढका हुआ है। इस बार घांघरिया से हेमकुंड के बीच छह किमी क्षेत्र में अटलाकोटी व छोटी अटालकोटी में हिमखंड मौजूद हैं।

अटलाकोटी से हेमकुंड तक तीन किमी क्षेत्र पूरी तरह बर्फ से ढका है। अटलाकोटी हिमखंड आठ फीट से अधिक ऊंचा है।

बताया कि घांघरिया से दो किमी आगे छोटी अटलाकोटी में एक दशक बाद हिमखंड देखने को मिल रहा है। यह हिमखंड 10 फीट से अधिक ऊंचा है। ताजा बर्फबारी में हेमकुंड के बेस कैंप घांघरिया में भी एक फीट से अधिक बर्फ है।

बताया कि सेना वैशाखी के बाद पैदल मार्ग को सुचारु करने और हेमकुंड साहिब से बर्फ हटाने की रणनीति बना रही है। इसके लिए ट्रस्ट व सेना के अधिकारी वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करेंगे।

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