उत्तराखंड में नीलकंठ में दो साल बाद टूटा सन्नाटा, रिकॉर्ड 2.50 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, तस्वीरों में देखिए…

ऋषिकेश : नीलकंठ पैदल मार्ग और लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मोटर मार्ग पर शिवभक्तों सैलाब उमड़ पड़ा। कोरोनाकाल में पहली बार नीलकंठ धाम में सन्नाटा टूट गया है। मंदिर में रिकॉर्ड 2.50 लाख शिवभक्तों ने जलाभिषेक किया। मंगलवार रात एक बजे से ही नीलकंठ में जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की लंबी लाइन लग गई। देर शाम तक मंदिर में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

महाशिवरात्रि पर नीलकंठ पैदल मार्ग और लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मोटर मार्ग पर शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। पैदल और मोटर मार्ग दिनभर भगवान शिव के जयकारों से गुंजायमान रहा। नीलकंठ पैदल मार्ग पर मंदिर से करीब डेढ़ किमी पहले भैरव मंदिर से शिवभक्तों की लंबी लाइन लग गई।

देर रात से ही शिवधाम में शंख, घंटी की ध्वनि और मंत्रोच्चारण शुरू हो गए थे। करीब दो साल बाद महाशिवरात्रि पर्व पर नीलकंठ धाम में शिवभक्तों की भारी भीड़ जुटी। नीलकंठ धाम के पुजारी शिवानंद गिरी ने बताया कि इस बार धाम में शिवभक्तों का रिकॉर्ड टूट गया है। जो कि एक अच्छी खबर है।

श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में भी शिवभक्तों ने नीलकंठ धाम में जलाभिषेक नहीं किया, लेकिन महाशिवरात्रि पर देर शाम तक भी धाम में भक्तों का आने का सिलसिला जारी रहा।

सुबह तीन बजे से ही शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लग गई। शिवभक्तों को करीब छह घंटे लाइन में खड़े होने के बाद शिवालयों में जलाभिषेक करने का पुण्य प्राप्त हुआ।नीलकंठ जाने के लिए देर शाम तक सड़कों पर वाहन फंसे रहे, जिसके चलते लंबा जाम लगा रहा। सोमेश्वर महादेव मंदिर और वीरभद्र महादेव मंदिर में भी यही हाल रहा। भीड़ को नियंत्रण करने के लिए जगह-जगह पुलिस कर्मचारी तैनात रहे।

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