उत्तराखंड में अरुण जोशी की छोटी बहन बनीं मां, बड़े भाई रसोइया, IIT के बाद यंगेस्ट IPS बने ; अब 41 साल में आईजी, जानिए उनके यहाँ तक के सफर की कहानी……

देहरादून: आईपीएस अफसर अरुण मोहन जोशी प्रमोशन के बाद आईजी बन गए हैं. वह न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देश के सबसे युवा आईजी हैं. वह 40 साल की उम्र में आईजी बने हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड आईपीएस अफसर गौरव राजपूत (41) के नाम पर दर्ज था.

भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की मुहर लगने के बाद कई अधिकारियों को प्रमोशन मिला है. इनमें आईपीएस अफसर अरुण मोहन जोशी, राजीव स्वरूप, स्वीटी अग्रवाल और अनंत शंकर ताकवाले शामिल हैं. वैसे तो ये सभी अफसर अपनी तेजतर्रार छवि के लिए जाने जाते हैं, लेकिन चर्चा जिस अधिकारी की हो रही है, वह अरुण मोहन जोशी (IPS Arun Mohan Joshi) हैं, जोकि भारत में सबसे कम उम्र के आईजी बन गए हैं. 2006 बैच के IPS अफसर अरुण मोहन जोशी उत्तराखंड के चकराता के रहने वाले हैं.

वह साल 2006 में सबसे कम उम्र (23 वर्ष) में आईपीएस अफसर बने थे. हालांकि इसके बाद और भी अधिकारी कम उम्र में IPS बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं. जबकि आईजी रैंक की बात करें, तो 2004 बैच के आईपीएस अफसर गौरव राजपूत 2022 में 41 साल की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के आईजी बने थे. अब यह रिकॉर्ड उत्तराखंड कैडर के अरुण मोहन जोशी के नाम हो गया है. वह 40 साल की उम्र में आईजी बने हैं.

आईपीएस अफसर अरुण मोहन जोशी एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के चकराता क्षेत्र के एक छोटे से गांव मुंधौल में हुआ था. उनकी पढ़ाई देहरादून और हरिद्वार में हुई है. उनके तीन भाई और एक बहन है. अरुण मोहन जोशी ने आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की है. उनके पिता सरकारी नौकरी में थे. वह पुलिस अफसर बनने का श्रेय अपने पिता को ही देते हैं.

छोटी बहन ने रखा ख्याल
आईपीएस अरुण मोहन जोशी ने कहा कि वह गांव में एक छोटे से घर में रहा करते थे. जब वह छोटे थे, तब ही उनकी मां का निधन हो गया था. मां का प्यार नहीं मिल पाया, लेकिन उनके पिता ने प्यार में कोई कमी नहीं की. उनके भाइयों और छोटी बहन ने बहुत ख्याल रखा. बहन भले ही छोटी थी, लेकिन समझदारी में वह सभी से बड़ी थी. छोटी बहन ने मां की तरह ख्‍याल रखा, तो पिता ने हमेशा एक दोस्त की भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि जीवन में एक दौर ऐसा भी आया, जब उन्हें लगने लगा था कि सब कुछ मुश्किल है, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

पुलिस अफसर बनने के लिए पिता ने किया प्रेरित
अरुण मोहन जोशी ने कहा कि जब वह आईआईटी रुड़की गए, तब उन्होंने देखा कि उनके साथी अलग-अलग फील्ड में जाने की बात कर रहे हैं. उस समय पिता ने उनका साथ दिया और पुलिस अफसर बनने के लिए प्रेरित किया. फिर उन्होंने पिता के कहने पर अपनी तैयारी की और 2006 में UPSC परीक्षा पास कर IPS अफसर बन गए. उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली में तैयारी कर रहे थे, तब बड़े भाई उनके लिए खाना बनाया करते थे.

पांच साल की सर्विस के बाद बने एसएसपी
बता दें कि अरुण मोहन जोशी को पांच साल की सर्विस के बाद ही हरिद्वार का एसएसपी बना दिया गया था. कांवड़ मेले में हजारों पार्किंग की व्यवस्था हो, मुंबई से गुमशुदा बच्ची को हरिद्वार से सकुशल बरामद करने और आरोपी को गिरफ्तार करने का मामला, हरिद्वार का कप्तान रहते हुए उन्होंने कुछ ऐसे काम किए थे, जिन्हें लोग आज भी नहीं भूल पाते हैं. इससे पहले वह उत्तरकाशी के एसपी के अलावा रुड़की में एएसपी और कुमाऊं मंडल में भी कई जगह अपनी सेवाएं दे चुके थे. उन्हें अंतिम फील्ड पोस्ट सितंबर 2019 में मिली थी. जब उन्हें देहरादून का एसएसपी बनाया गया था. देहरादून में भी उनका कार्यकाल शानदार रहा था।

हर पोस्टिंग में सीखने को मिला’
अरुण मोहन जोशी ने कहा कि वह हर पोस्टिंग में खुश रहे हैं. फिर वो पीएससी हो, उत्तराखंड विजिलेंस में डीआईजी या एसपी या फिर एसएसपी, हर तैनाती में उन्हें बहुत कुछ नया देखने और सीखने को मिला. पीएससी में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने देखा कि एक पुलिसकर्मी किस तरह से अपना जीवनयापन करता है. हालांकि लोगों के मन में पुलिस के प्रति अलग छवि होती है, लेकिन कोई अगर एक पुलिसकर्मी या उसके परिवार का जीवन नजदीक से देखें, तो उन्हें मालूम पड़ेगा कि किन परिस्थितियों में पुलिस काम करती है।

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