दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के रैंप की राह में ‘स्वाभिमान’ का रोड़ा, बीचों-बीच खड़ा है 28 साल पुराना मकान……..

देहरादून: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बनकर लगभग तैयार है। 14 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे, लेकिन लोनी के मंडोला गांव में दो मंजिला मकान ‘स्वाभिमान’ इसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। यह मकान एक्सप्रेसवे के रैप पर है। इससे एक्सप्रेसवे से इस रैप के जरिये गुजरने वाले वाले वाहन चालकों को परेशानी हो सकती है।

लोनी के मंडोला गांव में दो मंजिला मकान
नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इस घर के पीछे से आवास विकास की रोड को डिवेलप करना शुरू कर दिया है। दावा है कि उद्घाटन से पहले सड़क बना दी जाएगी। हालांकि अभी इस सड़क का निर्माण चल ही रहा है। स्वर्गीय वीरसेन सरोहा के परिवार का यह घर 28 सालों से कानूनी दांव-पेंच में फंसा है। 1998 में यह विवाद शुरू हुआ था। तब से यह मामला कोर्ट में पेंडिंग है। मुख्य रैंप इसी घर की वजह से अधूरा है।

1600 वर्ग मीटर का है विवाद
एनएचएआई को सड़क को पूरी करने के लिए 1600 वर्ग मीटर की जमीन की जरूरत है, लेकिन विवाद की वजह से यह जमीन नहीं मिल रही है। इस घर की देखभाल कानपुर निवासी जयपाल सिंह चार साल से कर रहे है। घर करीब 1000 वर्ग मीटर में बना है और 600 वर्ग मीटर अतिरिक्त जमीन है।

परिवार ने कहा, आज के हिसाब से मिले मुआवजा
परिवार की सदस्य पूजा नेहरा का कहना है कि यहां पर सर्विस लेन नहीं थी, लेकिन प्रॉजेक्ट को उठाने के लिए यहां एक्जिट दिलवाया गया। एक पुराने ऑर्डर में आवास विकास परिषद ने घर को अधिग्रहण से बाहर कर दिया था, लेकिन फिर एनएचएआई को जमीन दे दी। हमारी मांग है कि वर्तमान रेट के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।

विवाद की जड़: 1998 की हाउसिंग स्कीम
यह पूरा मामला साल 1998 में शुरू हुआ था, जब उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने मंडोला हाउसिंग स्कीम के लिए छह गांवों की करीब 2,614 एकड़ जमीन अधिग्रहण का नोटिस भेजा था। उस समय सरकार ने 1100 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा तय किया। अधिकांश किसान सहमत हो गए, लेकिन वीरसेन सरोहा इलाहाबाद हाई कोर्ट चले गए। कोर्ट ने उनके घर के अधिग्रहण पर रोक लगा दी। इसी बीच सरकार ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की योजना बनाई। आवास विकास परिषद ने विवादित जमीन एनएचएआई को दे दी। एक्सप्रेसवे का निर्माण अंतिम चरण में पहुंचा तो पता चला कि यह घर ठीक उसी जगह है, जहां से रैप का निर्माण होना है।

कल पीएम करेंगे लोकार्पण, आज रैंप वाली सड़क पर उड़ रही धूल
बताया गया कि पूरा प्रॉजेक्ट करीब 12 हजार करोड़ रुपये का है। अब मंडोला में घर के पीछे सड़क बन रही है। इसका निर्माण अंतिम चरण में है। अधिकारियों का दावा है कि इसे 14 अप्रैल से पहले तैयार कर लिया जाएगा।

ये हैं समस्याएं
एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा लोनी और मंडोला के आसपास है। इस मकान की वजह से मुख्य रैंप का निर्माण अधूरा है। ऐसे में देहरादून से आने वाले ट्रैफिक को एक्सप्रेसवे से नीचे उतरने में दिक्कत होगी।
मंडोला के पास ही ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का इंटरचेंज (जंक्शन) है, इस रुकावट के कारण सुगम रास्ता नहीं मिल पाएगा।
एनएचएआई जिस वैकल्पिक रोड को विकसित कर रहा है वह एक सर्विस रोड के रूप में काम करेगी। मुख्य एक्सप्रेसवे के मुकाबले इसकी चौड़ाई और क्षमता कम होगी।

बाद में लैडयूज बदल दिया
वीरसेन सरोहा के निधन के बाद उनके पोते लक्ष्यवीर केस की पैरवी कर रहे हैं। 2024 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि जब मूल प्रॉजेक्ट (हाउसिंग स्कीम) कभी शुरू ही नहीं हुआ तो जमीन NHAI को सौपना गलत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच को जल्द निपटारे का निर्देश दिया।

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