उत्तराखंड की चौंसा दाल क्यों बन रही है हर थाली की शान, जानें बनाने की पहाड़ी विधि…….

ऋषिकेश: उत्तराखंड की पारंपरिक चौंसा दाल अपने देसी स्वाद, खुशबू और पोषण के कारण फिर से हर थाली की शान बन रही है. पहाड़ों में सदियों से बनाई जा रही यह दाल कम मसालों में पकती है, लेकिन इसका स्वाद बेहद खास होता है. शुद्ध घी, स्थानीय मसाले और धीमी आंच पर पकाने की पहाड़ी विधि इसे सेहतमंद और लाजवाब बनाती है।

उत्तराखंड की पारंपरिक थाली में अगर किसी दाल ने अपनी अलग पहचान बनाई है, तो वह है चौंसा दाल. यह दाल न केवल अपने अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि इसकी खुशबू और हल्की बनावट भी इसे खास बनाती है. पहाड़ी इलाकों की साफ हवा, शुद्ध पानी और प्राकृतिक खेती का असर इस दाल के स्वाद में साफ महसूस होता है. स्थानीय लोगों के लिए चौंसा दाल सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है. धीरे- धीरे पकने वाली यह दाल सादगी में छिपे स्वाद का बेहतरीन उदाहरण है, जिसे एक बार चखने के बाद भूल पाना मुश्किल हो जाता है।

चौंसा दाल मुख्य रूप से उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाई जाती है. यहां की मिट्टी और मौसम इसे एक खास स्वाद और पोषण प्रदान करते हैं. यह दाल आम दालों की तुलना में हल्की होती है और आसानी से पच जाती है, इसलिए इसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं. चौंसा दाल में प्रोटीन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं।

धीमी आंच पर पकाने पर दिया जाता है जोर
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान गृहिणी रीना ने बताया कि इस दाल की रेसिपी बेहद सरल है, लेकिन इसका स्वाद बहुत गहरा होता है. सबसे पहले चौंसा दाल को अच्छे से साफ करके कुछ घंटों के लिए भिगो दिया जाता है. भिगोने से दाल जल्दी पकती है और उसका नैचुरल फ्लेवर बना रहता है. इसके बाद दाल को हल्की आंच पर उबाला जाता है. पहाड़ी रसोई में तेज आंच से ज्यादा धीमी आंच पर पकाने पर जोर दिया जाता है, ताकि हर सामग्री का असली स्वाद सामने आए।

जब दाल अच्छी तरह गल जाती है, तब इसमें नमक डाला जाता है. इसके बाद तड़के की तैयारी की जाती है, जो इस दाल की जान माना जाता है. देसी घी में जीरा, लहसुन और जखिया डाला जाता है. जखिया उत्तराखंड की एक खास मसाला बीज है, जो तड़के में हल्की सी चटकन और अनोखी खुशबू देता है. जैसे ही यह तड़का तैयार होता है, इसे दाल में डाला जाता है और हल्के से चलाया जाता है।

इस प्रक्रिया से दाल में एक खास सुगंध और स्वाद आ जाता है. चौंसा दाल को आमतौर पर भाप में पके चावल या मंडुए की रोटी के साथ परोसा जाता है. इसके साथ घर का बना नींबू का अचार या भांग की चटनी स्वाद को और बढ़ा देती है।

पहाड़ी घरों में यह दाल खास मौकों के साथ-साथ रोजमर्रा के खाने में भी बनाई जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना ज्यादा मसालों के भी बेहद स्वादिष्ट लगती है।

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